सावधान! सोमवार को बाल धोना आपके लिए हानिकारक तो नहीं?

सावधान! सोमवार को बाल धोना आपके लिए हानिकारक तो नहीं?

सोमवार के दिन बाल धोना चाहिए या नहीं कई लोग जो विविध प्रकार की मान्यताओं एवं परंपराओं पर विश्वास रखते हैं। जो वैदिक धर्म के अनुरूप कार्य करते हैं। उनके मन में यह प्रश्न अवश्य उठता है कि सोमवार के दिन बाल धोना चाहिए या नहीं अभी तक जितनी भी बातें हमारे पूर्वजों के द्वारा हमारे दैनिक जीवन से संबंधित बताई गई है। लगभग सभी बातें विज्ञान के द्वारा भी सही एवं सटीक एवं उपयुक्त मानी गई है।

हालांकि हमारे पूर्वजों के द्वारा बताए गए विभिन्न प्रकार की विधियों एवं परंपराओं का वैज्ञानिक रूप से स्पष्टीकरण तो हो चुका है। किंतु फिर भी अभी भी कई ऐसी चीजें है। जिस पर शोध होने की आशा भविष्य में संभव प्रतीत होती है। आखिर कुछ तो ऐसी बात होगी जो हमारे पूर्वजों के द्वारा यह बताई गई है कि सप्ताह के 3 दिनों पर अपने शरीर के विभिन्न अंगों की सफाई करना चाहिए।

यह धारणाएं भले ही कभी-कभी हास्यप्रद प्रतीत होती है किंतु यह सोचना भी आवश्यक है कि क्या केवल हमारा सीमित ज्ञान ही ज्ञान का उत्कृष्ट रूप है। क्या हमारा सीमित ज्ञान ही ज्ञान का पूंज फिर हमारे पूर्वजों के द्वारा बताए गए विभिन्न बातों का क्या उनके द्वारा विभिन्न चीजों पर किए गए प्रयोग एवं विविध प्रकार के सूक्ष्म अवलोकन के आधार पर ही उनके द्वारा हमें कई चीजों को किस प्रकार से करना चाहिए? एक विस्तृत अवस्था हमें उनके द्वारा प्राप्त हुई है जैसे हिंदू धर्म में लोग मुख्यत गुरुवार के दिन बालों को धूल ना या नाखून को काटना वर्जित मानते हैं।

ऐसी मान्यता है कि गुरुवार के दिन कभी भी किसी भी चीज को नष्ट नहीं करना चाहिए क्योंकि गुरु की दृष्टि जिस भी चीज पर पड़ती है। वह चीज अपने आप में बड़ी स्वरूप में परिवर्तित हो जाती है। चाहे वह नकारात्मक चीजें हो या सकारात्मक चीजें हो गुरु का स्थान विभिन्न ग्रहों में विभिन्न नक्षत्रों में सबसे ऊंचा रखा गया है क्योंकि गुरु के बिना ज्ञान प्राप्त करना असंभव है।

ऐसे में उनकी अवहेलना करना या उनके बनाए गए नियमों का उल्लंघन करना किसी व्यक्ति विशेष को बहुत अधिक परेशानी में डाल सकता है किंतु आज हम गुरुवार के बारे में नहीं बल्कि सोमवार के दिन बाल धोना चाहिए या नहीं उस पर विस्तार से चर्चा करेंगे और जानेंगे कि किन-किन विशिष्ट अवसरों पर सोमवार के दिन हमें अपने बालों को धुलना नहीं चाहिए।

 

 

1)• ऐसी मान्यता है कि सोमवार के दिन बाल उन लोगों को बिल्कुल भी नहीं भूलना चाहिए। जिनकी पहली संतान लड़की है क्योंकि यदि माता या पिता जब सोमवार के दिन बाल भूलते हैं। तो ऐसे में बेटी के वैवाहिक जीवन पर बहुत अधिक भार पड़ता है एवं उसे अपने दांपत्य जीवन में कई तरह की परेशानियों को झेलना पड़ता है।

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2)• यदि कोई सोमवार के दिन अमावस्या जैसी तिथि पड़ती है। तो उस दिन भी भूल कर भी बाल धुलना नहीं चाहिए। इससे आर्थिक स्थिति खराब होने की संभावना बहुत अधिक रहती है। अमावस्या की तिथि पितरों को मान सम्मान प्रदान करने की तिथि मानी जाती है तथा पूरे महीने में यह एक ऐसा दिन होता है जब हम अपने गलतियों के लिए अपने पूर्वजों से क्षमा मांग सकते हैं।

यह एक ऐसा दिन माना जाता है जिस दिन दान एवं पवित्र नदियों में स्थान व्यक्ति को सभी तरह के कष्टकारी परिस्थितियों से बचाता है। जब कभी भी सोमवार के दिन अमावस्या की विशिष्ट अतिथि पड़ती है। तो उसे सोमवती अमावस्या से संबोधित किया जाता है। यदि कोई स्त्री जो वैवाहिक है या कोई पुरुष जो वैवाहिक है। अपने घर की सुख समृद्धि को सदा मजबूत स्थिति में बनाए रखना चाहता है।

तो ऐसे में उसे कभी भी सोमवती अमावस्या के दिन बाल भूलने से बचना चाहिए। जिन दंपतियों के संतान को यदि स्वास्थ्य संबंधित कोई परेशानी है। तो उन्हें भी इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि भूल कर भी इस दिन बाल नहीं भूलना चाहिए तथा वर्जित कार्यों से खुद को सुरक्षित रखना चाहिए। अन्यथा लगातार आप अपने जीवन में परेशानी देखेंगे, इसके साथ ही संतान से संबंधित कोई न कोई परेशानी कोई न कोई बाधा आपको लगातार विचलित करती रहेगी। पितरों का नाराज होना आपके घर परिवार में लड़ाई- झगड़े का कारण बन सकता है।

आपकी सुख शांति पर काला ग्रहण लगने की संभावना बढ़ सकती है। अतः मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन बाल नहीं धूलना चाहिए। यदि संभव हो तो बच्चों को भी इस दिन बाल धोने से रुके तथा उन्हें इस विशिष्ट दिन का महत्व समझाएं एवं उन्हें उनके पूर्वजों के द्वारा किए गए कार्यों से अवगत कराएं तथा उनसे भी दान की सामग्री का वितरण असहाय एवं गरीब लोगों में अवश्य कराएं। इसके साथ ही जानवरों की सेवा अवश्य करें।

उन्हें गाय की शुद्ध दूध से बने हुए खीर को भोजन के रूप में अवश्य दें। आखिर हमारे बुजुर्गों के द्वारा कुछ बातें बताई गई है तो किसी न किसी रूप में अवश्य ही हमारे जीवन को प्रभावित करती होंगी इसलिए यदि संभव हो तो लड़ाई झगड़े कलह- क्लेश आदि जैसी चीजों को हमें टालने के लिए जो करना चाहिए। उसे अवश्य करने की चेष्टा करनी चाहिए।

भागदौड़ भरी जिंदगी में भले ही हम अपने आप को भूलते जा रहे हैं किंतु जब तक हम अपने जड़ से जुड़े हुए नहीं रहेंगे। तो हम आगे अपने अस्तित्व को खो देंगे इसलिए आवश्यक है कि हमारी संस्कृति हमारी परंपरा का हमें सही बोध हो। अतः सोमवार के दिन बाल धोने से बचे तथा अपने परिजनों को भी इस दिन बाल धुलने से होने वाले नुकसान के बारे में अवगत कराएं।

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आशा है आप सभी प्रिय पाठकों को आपके मन में उठ रहे विभिन्न प्रकार के सवालों के सटीक उत्तर हमारे द्वारा दिए गए इस लेख में प्राप्त हो गया होगा किंतु हम भी तो एक मनुष्य हैं।

यदि हमसे फिर भी कोई त्रुटि हो जाए तो हमें क्षमा करने की चेष्टा करें। आगे भी आप हमारे वेबसाइट पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों को प्राप्त करने के लिए कृपया विजिट करते रहे आप सभी लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद!

 

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